सेल्फी क्रेज़: विसुअल कल्चर की दौड़ में जीवन से ज्यादा इमेज को महत्व दे रहे हैं हम
सेल्फी लेना हम सभी को पंसद है। जीवन के खास पलों की स्मृति को शौकिया तौर पर संरक्षित करना परफेक्ट क्लिक के बिना संभव नहीं है। सेल्फी का ट्रेंड टेक्नोलॉजी के साथ डिजिटल परिदृश्य में तूफानी ताकत की तरह बहुत तेजी से आगे बढ़ चुका है। सेल्फी की शुरुआत स्वयं का पोट्रेट मजेदार ढंग से क्लिक करने के लिये हुई। एक अच्छे और आकर्षक परफेक्ट शॉट और स्वयं के प्रति ध्यान आकर्षित करने की लालसा वाली सोच से सेल्फी का तरीका ही बदल गया है। अब ये अविश्वसनीय ढंग से एक जोखिम भरा प्रयास बन रहा है। सेल्फी लेना किसे पंसद नहीं है ? लेकिन , यह जरूर ध्यान रखे कि आप अगली सेल्फी क्लिक करते समय जिंदा रहे। जहाँ स्मार्टफोन और सेल्फी स्टिक ने शानदार सेल्फी लेने की राह आसान बना दी है वहीँ इस वजह से अकल्पनीय स्थान जैसे ट्रेन की पटरियों , ऊंची इमारतों और पुलों पर जोखिम के साथ सेल्फी लेने का चलन भी बढ़ा है। यहां तक कि सेल्फी प्रेम के चलते प्रतिबंधित क्षेत्रों तक को नहीं छोड़ा जाता। यही वजह है कि दुनिया में सेल्फी लेने के चक्कर में जान गंवाने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसने एक नये शब्द...